-:: अनमोल मोती – 376 ::-

1. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के दीने इस्लाम की बुन्याद पांच चीज़ो पर राखी गई है. अ. इस बात की गवाही देना के अल्लाह अज़वजल्ल के सिवा कोई माबूद नहीं और मुहम्मद सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम उसके रसूल है बी. नमाज़ कायम करो सी. ज़कात अदा करो डी. हज करो और इ. माहे रमज़ान के रोज़े रखो.
2. नमाज़ के बाद जिस चीज़ का ज़िक्र किया गया है वोह ज़कात है. ज़कात इस्लाम का तीसरा रुकन और माली इबादत है. कुर्राने मज़ीद फुरकान हामिद में ज़कात अदा करनेवालों की तारीफ व् तौसीफ और ज़कात ना देने वालो की मजम्मत की गई है.
3. याद रहे के मालिके निसाब होने की सुरतमे ज़कात के मसाइल सिख लेना फर्ज़े ऐन है. ज़कात का फ़र्ज़ होना कुर्रान से साबित है, और ज़कात का इन्कार करनेवाला काफिर है.
4. ज़कात का अदा करना तकमीले ईमान का ज़रिया है. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के “तुम्हारे इस्लाम कापूरा होना यह के की तुम अपने मालोकी ज़कात अदा करो.” एक और मकाम पर इरशाद फ़रमाया के “जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रखता हो उसे लाज़िम है के अपने माल की ज़कात अदा करे.”
5. ज़कात अदा करने वाले पर अल्लाह अज़वजल्ल की रहमत नाज़िल होती है. सुरतुल आरएफ में है के “और मेरी रहमत हर चीज़ को घेरे है तो अनक़रीब में नेमतोंको उन के लिए लिख दूंगा जो डरते है और ज़कात अदा करते है.”
6. ज़कात अदा करने से तक़वा हासिंल होता है. कुर्राने पाक में मुत्तक़ीन की अलामत मेसे एक अलामत यह भी बयानकी गई है चुनचे इरशाद होता है “और हमारी दी गई रोज़ी में से हमारी राहमे खर्च करो.
7. ज़कात अदा करने वाले लोग कामयाब लोगो की फेहरिस्तमें शामिल हो जाता है. चुनचे कुर्राने पाकमें फलाह को पहुँचने वालो का एक काम ज़कात भी गिनवाया है. चुनांचे इरशाद होता है के “बेशक मुराद को पहुंचे ईमानवाले जो अपनी नमाज़मे गिड़गिड़ाते है और वोह जो किसी बेहूदा बात की तरफ इल्तिफ़ात नहीं करते और वोह की ज़कात अदा करनेका काम करते है.”
8. अल्लाह अज़वजल्ल ज़कात अदा करने वालोंकी मदद फरमाता है. चुनांचे इरशाद होता है के “और बेशक अल्लाह तआला ज़रूर मदद फरमाता है जो उसके दीन की मदद करेगा. बेशक अल्लाह तआला क़ुदरतवाला ग़ालिब हैं.वोह लोग की के अगर हम उन्हें ज़मीनमें काबू दे तो नमाज़ बरपा रखे और ज़कात अदा करे और भलाई का हुक्म करे और बुराई से रोके और अल्लाह ही के लिए सब कामोंको अंजाम दे.

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-:: अनमोल मोती – 375 ::-

१. सैयदना मौला अली रदियल्लाहो तआला अन्हो को खुद रसूले अकरम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम कुर्राने पाककी तालीम दिया करते थे.

२. सबसे पहले सैयदना जेब्रेइल अलैहिस सलामने अर्शे इलाहीकी अज़मत को देख कर “सुब्हानल्लाह” कहा.

३. सबसे ज़यादह अlहादीसे करीमा सैयदना अबु होरैरह रदियल्लाहो तआला अन्होंसे मरवी है.

४. सैयदना यूसुफ़ अलैहिससलामको उनके भाइयोंने सौदागरोंके हाथ 20 दिरहम में बेचा था.

५. सैयदना ईसा अलैहिससलाम 33 तेतीस सालकी उम्र पाकमें आसमान पर उठा लिए गए.

६. सैयदना उज़ैर अलैहिससलाम इन्तेकालके बाद 100 सो सालके बाद फिर ज़िंदा होकर फिर अपनी कॉम में आये.

७. सैयदना आदम अलैहिससलाम सात लाख ज़ुबान जानते थे.

८. सरकारें दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमकी कब्रे मुबारक हज़रात अबु तल्हा रदियल्लाहो अलयहे वसल्लमने तैयारकी थी.

९.  कुर्राने मजीदको सबसे पहले मुसाहफमे सैयदना अबूबकर सिद्दीक़ रदियल्लाहो तआला उन्होंने जमा किया.

१०. सैयदना हज़रत ओमर रदियल्लाहो तआला अनहोकी नेकिया आसमानके सितारोंके बराबर है.

११. सैयदना हज़रत उस्माने गनी रदियल्लाहो तआला अन्होकी सफाअतसे 70.000 जहन्नमी जन्नतमे जाएगे.

(B). अज़वजह अज़वजल्ल इरशाद फरमाता है के…

१.  जिसने अपने नफ़्सको वासनासे रोका तो उसका ठिकाना जन्नत है.

२. जो कुछ तुम्हारे पास है वोह पूरा हो जाएगा और जो अल्लाह तआलाके पास है बाकी रहेगा.

३. जो बन्दा अल्लाह अज़वजल पर भरोसा रखता है फिर अल्लाह अज़वजल उसके लिए काफी है.

४. पता चल जाए के यह शख्स ज़ालिम है तो फिर उसके पास न बैठो.

५. बेशक! कान, आँख, दिल इन सबको पूछा जाएगा.

६. अल्लाह तआला इमांनवालोंका बदला बर्बाद नाही होने देता

७. अल्लाह अज़वजल काफिरो और मुशरिको को कभी मोआफ नहीं करेगा.

८. बेशक! किताबी काफिरो (ईसाई और यहूदी) और मुशरिकोकों हमेशाके लिए दोजककी आगमें रहना पडेगा.

९. मेरी रहमत हर चीज़ को घेर लेती है.

१०. बेशक! ईमानवालोकी नमाज़े जनाज़ा पढ़ो क्यों के तुम्हारी नमाज़ उनके लिए शांति-शुकुनका सबब है.

११. इज़्ज़त अल्लाह अज़वजल्ल, सरकार दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम और इमानवालोके लिए है.

१२. मोअमीन के लिए इस दुन्यामे आराम नहीं.

१३. अमल करो, तक़दिरका बहाना ना करो.

१४. पहले अपनी इस्लाह करो, फिर दूसरोंकी फ़िक्र करो.

१५. तेरे इखलासकी तारीफ़ (पहचान) यह है के तू लोगोकी तारीफ़ व्  मज़म्मत (निंदा-बुराई) की तरफ ध्यान ना दे.

१६. मोमिन ज्यूँ-ज्यूँ बूढा होता है त्यु-त्यु उसका ईमान ज़यादह मजबूत  होता है.

१७. अल्लाह तआलाके करीब वोही होता है जो मखलूक पर महेरबान होता है.

१८. मौतको याद करनेसे मुसीबत कम हो जाती है.

१९. तकब्बुर करनेवालेका सर नीचा होजाता है.

२०. सूफी वोह है जिसका जाहिरी और बातिनी साफ़ हो.

२१. तुम दुन्या के पीछे पड़े हो मगर दुन्या अल्लहवालोके पीछे फिरती है.

२२. तमाम खुशयोंका मजमुवा (संग्रह) इल्म शिखना, फिर उसपर अमल करना और फिर दुसरो तक पहुचाना.

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-:: अनमोल मोती – 374 ::-

(A) घरेलु इलाज:-
१. अगर पिशाब में रुकावट हो तो ताज़ी छास में गुड डालकर पीओ.
२. नारियल पानीमे निम्बूका रास मिलाकर हररोज़ पीनेसे पथरी की तकलीफ दूर होती है.
३. एक चमची अंजीरक रस शहद (मध्) में मिलाकर हररोज़ पिलानी कमज़ोर बच्चे ताकतवर बनते है.
४. फुदीना और अदरख का कावा (उकाला) पीनेसे शर्दी मिटती है.
५. पाँवकी सूजन पर कोप्ररेलका तेल गरम करके मालिश करनेसे राहत मिलती है.
६. तज का कावा पीनेसे उलटी (वोमीट) मिटती है.
७. कच्ची केरीको बाफ कर सककर मिलाकर पीनेसे गर्मी और लू में राहत मिलती है.
(B) अच्छी बाते:-
१. बोल कर सोचना पड़े इससे तो बेहतर है के सोच कर ही बोले.
२. जिस शख्सको किसीसे क़र्ज़ लेनेकी और किसीकी खुशामत करनेकी ज़ूरूरत नहीं वोह दुन्यामे सबसे मालदार शख्स है.
३. जन्नत तलब ना कर, ऐसी चीज़ तालाब कर के जन्नतको तेरी तलब हो.
४. दोज़खसे दूर ना भाग, ऐसी चिज़ोसे दूर भाग के दोज़ख तुजसे दूर भागे.
५. थोड़ीसी ताज़ीम व् अदब बहोतसे इल्म व् इबादतसे बेहतर है.
६. अपनी कमाई पाक रखो, दुवा कुबल होगी.
(C) अल्लाह अज़वजलको ना-पसंद है …
१. परहेज़गारोमे खुदकी बड़ाई बयान करना…
२. जवानोंमे सुस्ती..
३. फकीरोमे घमंड-बड़ाई (गुरुर)
४. औरतोमे बे-हयाई-बेशर्मी, बे-पर्दगी…
५. लश्करमे बुज़दिली…
६. बादशाहमें ज़ुल्मो-सितम…
७. उम्र रसीदा लोगोमे (बुढोमें ) दुन्याकी मोहबात…
८. आलिमोमें लालच…

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-:: अनमोल मोती – 373 ::-

वालेदैन के हुकूक उनकी वफात के बाद
आला हज़रात मुजद्दीदी दीनो मिल्लत इमाम अहमद राजा रहमतुल्लाह तआला अलयहे को किसीने सवाल किया के वालेदैन की वफात के बाद औलाद पर उनके कोनसे हुक़ुक़ बाकी रहते है? आपने जवाब दिया के पहला हक़ उनकी वफातके बाद फ़ौरन जनाज़े की तयारी, ग़ुस्ल, कफ़न, नमाज़े जनाज़ा और दफ़न.
१. उनके लिए दुवा-अस्तग़फ़ार करते रहना इसमें कभी चूंक ना करना.
२. सदकात, खैरात, और नेक अमल करके वालेदेनको सवाब पहोचाते रहना. अपनी नमाज़ के साथ उनके लिए भी नमाज़ पढ़ना, रोज़ा रखना बल्कि जो कुछ भी नेक काम करो उसका सवाब वालेदैन और तमाम मरहमिनोको पहुचते रहना ताके उनको सवाब पहुचता रहेगा और खुदके सवाबमे कोई कमी नहीं होगी.
३. वालेदैन पर अगर कोई क़र्ज़ बाकी रहा गया हो तो उस क़र्ज़ को अदा करनेकी ज़यादह से ज़यादह कोशिश करनी चाहिए. अपने मालमेसे वालेदेनका क़र्ज़ अदा करनेमे दोनों जहान की भलाई है. अगर औलाद वालेदेनका क़र्ज़ अदा करनेकी ताकत ना रखती हो तो उसे रिस्तेदारोंसे और नेक लोगोसे इमदाद लेनेमेभी कोई हर्ज़ नहीं है. .
४. वालेदैन पर कोई फ़र्ज़ बाकी रहा गया हो तो अपनी ताकत के मुताबिक़ अदा करनेकी कोशिश करते रहना चाहिए. मसलन वालेदैन पर हज फ़र्ज़ बाकी रह गया हो तो उनके बदले हज करो या हज्जो बदल करवालो. वालेदैन पर ज़कात अदा करना बाकी रह गया हो तो उनकी तरफसे ज़कात अदा करे. नमाज़ या रोज़ा बाकी रह गया हो तो उसका कफ़्फ़ारा अदा करे. इस तरह वालेदैन की नजातकी हर मुमकिन कोशिश करते रहना चाहिए.
५. वालेदैनने जो जाएज़ वसीहत की हो तो जहां तक हो शेक पूरी करनेकी कोशिश करनी चाहिए.
६. वालेदैनकी कसम उनकी वफात के बाद भी बाकी रखनी चाहिए। हर जाएज़ कामोमे उनकी वफातके बाद भी उनकी मर्ज़ीका पाबन्द रहना चाहिए.
७. हर जुम्मा को वालेदैन की कब्रकी ज़यारत करना, उनकी कब्रके पास यासीन शरीफ की तिलावत करना, अगर रास्ते चलते उनकी कब्र तो सलाम और फातेहा पढ़े बगैर आगे ना बढे.
८. वालेदैन के रिस्तेदारोके साथ हंमेशा के लिए अच्छा सुलूक करना, उनके दोस्तों के साथ दोस्ती निभाना, और उनके दोस्तोंकी इज़्ज़त करना.
९. कभी भी किसीके वालेदैन को बुरा ना कहना ताकि कोई तुम्हारे माँ-बाप को भला-बुरा कहे.
१०. कभीभी किसी गुनाहमे सामिल होकर वालेदैन को उनकी कब्रमे तकलीफ ना पहुचाए। क्योके हमारे सारे अआमालकी खबर वालेदैन को उनकी कब्रमे पहुचती रहती है. जब हम नेक अमल करते है तो वोह कब्रमे खुश होते है और हमारे गुनाह करने पर वोह दुखी होते है, उन्हें ठेस पहुचती है. औलाद को यह हक़ नहीं पहुचता के वोह अपने वालेदेनको उनकी कब्रमे तकलीफ पहुचाए.
११. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के वालेदैन के साथ अच्छा सुलूक करनेमे उनकी वाफात के बाद उनकी मग़फ़ेरतकी दुवा करना भी सामिल है.
१२. कोई बंदा अगर नफ़्ल खैरात करे तो उसे चाहिए के वोह खैरात अपने वालेदैन की तरफसे करे ताकि उसका सवाब उनको भी मिले इस अमलसे उसके खुदके सवाबमें कोई कमी न आएगी.
१३. जब बन्दा वालेदैनके हकमे दुवा करना छोड़ देता है तो उसके रिज़क़मे कमी आजाती है.
१४. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के जो बंदा अपने माँ-बापकी तरफसे हज करता है या उनका क़र्ज़ अदा करता है या उनकी कब्रकी हर जुम्मा ज़यारत करता है तो उसे रोज़े क़यामत नेक लोगोके साथ उठाया जाएगा. माँ-बाप की तरफसे किया हुवा हज अल्लाह तआला कुबूल फरमाता है और उनकी रूह आसमानमे खुश होती है और ऐसा बन्दा वालेदैनके साथ अच्छा सुलूक करनेवाला लिखा जाता है. और उसे दस हज करनेका सवाब मिलता है.
१५. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के जो बन्दा वालेदैनकी हयाती के बाद उनकी कसम पूरी करे, उनका क़र्ज़ अदा करे, दूसरोके माँ-बाप को भला-बूरा कहकर अपने माँ-बाप को भला-बुरा न कहलवाए उस बंदेको वालेदेनका फरमाबरदार लिखा जाता है फिर चाहे वोह उनकी हयातीमे ना-फरमान भले ही हो. और जो बंदा माँ-बाप की कसम पूरी न करे, उनका क़र्ज़ अदा ना करे, दूसरोके माँ-बापको भला-बूरा कहकर अपने वालेदैनको भला-बुरा कहलवाए तो ऐसे बंदेको माँ-बापका ना-फरमान लिख दिया जाता है, फिर भले ही वोह अपने माँ-बापकी हयातीमे उनका फरमाबरदार हो.
१६. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के जो बंदा जुम्माके दिन अपने वालेदैन या उनमेसे किसी एक की कब्रकी ज़यारत करे और वहां बैठ कर यासीन शरीफ की तिलावत करे तो उस बंदे को बख्स दिया जाता है.
१७. जो बन्दा सवाबकी नियतसे अपने वालेदैन या दोनोंमेसे एक की कब्र की ज़यारत करे तो उसे मकबूल हजका सवाब मिलता है और जो बन्दा बार-बार अपने वालेदैन या दोनोंमेसे किसी एक की कब्रकी ज़यारत करे तो उसकी अपनी कब्र की ज़यारत करनेके लिए फ़रिश्ते तशरीफ़ लाते है.

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-:: अनमोल मोती – 372 ::-

१. इमामे आज़म हज़रत अबू हनीफा रहमतुल्लाह तआला अलयहे ने अपने बेटेको वसिय्यत करते हुवे फरमाया के हररोज़ कुर्रान शरीफकी तिलावत करते रहो और उसका सवाब सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम, वालेदैन उस्ताद और तमाम ईमानवालो को बख्सते रहो.

२. हज़रत मुल्ला अली कारी शर्हे मिशकातमे फरमाते है के सैयद शेख अकबर मोहियुद्दीन बिन अरबीने फरमायाके सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमकी हदीश शरीफ मुझ तक पहोची के जो बंदा 70,000 बार “ला-इलाहा-इल्लल्लाह” पढ़ेगा उसकी मग़फ़ेरत हो जाएगी और जिसके इसाले सवाब के लिए पढ़ेगा उसकी भी मग़फ़ेरत हो जाएगी.
३. दैलमी-ऐ-मसनदुल फ़िरदोषमे हज़रत अबु दरद रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम ने फरमाया के सूर-ऐ-फातेहा उस काममे काफी है जिस काममे कुरआन शरीफका दुसरा हिस्सा काफी न हो. मतलब के सूर-ऐ-फातेहा एक पलड़ेम और कुर्रान शरीफ दूसरे पलड़ेम रख्खा जाए तो सूर-ऐ-फातेहा की फ़ज़ीलत सात गुनी बढ़ जाए.
४. बयहकी शोएबुल इमानमे रिवायत है के सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम ने फरमाया के जब तुममेसे किसीकी मौत हो जाए तो उसे रोका ना जाए, जल्दीसे कब्रमे पहुचाया जाए और उसके सरके पास सूर-ऐ-बक़रह का पहला हिस्सा पढ़ा जाए और उसके पैर के पास सूर-ऐ-बक़रह का आखरी हिस्सा याने इससे मुराद “आमनर-रसूलो से काफेरीन” तक.
५. हज़रात अब होरैरह रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम ने फरमाया के हर चीज़की एक चोटी होती है और कुर्रान शरीफकी चोटी सूर-ऐ-बक़रह है और उसमे एक आयात जो कुर्रान शरीफकी सरदार है वोह है “आयतुल-कुरशी”

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-:: अनमोल मोती – 371 ::-

हज़रत इमाम जेनुल आबेदीन रदियल्लाहो तआला अन्हो अपने चहीते बेटे इमाम बाकिर रहमतुल्लाह तआला अलयहेको नशीहत फरमाते है के पांच किस्मके लोगोसे दोस्ती नहीं रखना.
(1) फ़ासिक़ और खुलेआम गुनाह करनेवालेसे, जो तुम्हे कोडीओके दाम बेच देगा. ऐसे लोग बहुत लालची होते है, ऐसे गुनाह करनेवाले लोग अल्लाह तआला और सरकार दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमकी नाफरमानी करनेमे शर्म नहीं महसूस करते तो भला वोह तम्हारी क्या फ़िक्र करेगे.
(२) जुठ बोलनेवालेसे भी दोस्ती ना करना क्योके वोह भरोसेमंद नहीं होते, वोह फरेबी दुरका नज़दीक और नज़दीक का दूर दिखाते है.
(३) बख़ील-कंजूस लोगोसे भी दोस्ती नहीं करना क्यों के ऐसे लोग ऐन वक़्त पर मदद नहीं करते. उन लोगोसे तुम्हे हमेशा नुकशान ही पहुचता है.
(४) बे-वकूफ लोगोके साथ भी दोस्ती नहीं करना क्यों के ऐसे लोग अगर तुम्हे फायदा पहुचाना चाहे तबभी नुकशान पहुचता है.
(५) रिस्तेदारोंसे ताल्लुक तोड़नेवालोसे भी दोस्ती ना रखे क्यों के किताबे-इलाहीमे आया है के ऐसे लोगो पर अल्लाह तआलाकी लअनत है.
(६) आप फरमाते है के जो लोग दोज़ख़के डरसे इबादत करते है वोह गुलामो और बांदियोमे सुमार होते है. जो लोग जन्नतकी लालचमें इबादत करते है वोह तिजारत करनेवालोमे याने बेपारीयोमे सुमार होते है, और जो लोग सिर्फ और सिर्फ अल्लाह अज़वजलके लिए इबादत करते है वो आज़ाद लोगो की तरह है.
(७) मोअमिन (ईमानवाला) वोह है जो अपने इल्मको अक्लके साथ जोड़कर-मिलाकर रखे, अगर सवाल पूछे तो जानकारी हासिल करनेका इरादा हो अगर चुप रहे तो समझने और अमल करनेके इरादेसे हो.
(८) राहत पर शुक्र करना मुसीबत पर सब्र करनेसे बेहतर है.
(९) सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमका इरशाद है के मैयत कब्रमे ऐसी होती है जिसे पानीमे डूबता हुवा शख्स, जो मदद के इंतज़ारमे रहता है. माँ-बाप या दोस्तकी दुवाए जब कब्रवाले तक पहुचती है तो उसे सबसे ज़यादह सवाब पहुचाती है. अल्लाह तआला दुनयावालोकी दुवाओंसे कब्रस्तानवालो पर पहाड़की मानिंद खैरो-बरकत और नूर नाज़िल फरमाता है. मुर्दोंके लिए दुवा करना उनकी तरफसे सदका करना उनके लिए बेहतरीन तोहफा है.
(10) जिस किसीको अपने किसी भाईकी मौतकी खबर पहुचे और वोह उस मरनेवालेके लिए मग़फ़ेरतकी दुवा करे तो उसे उसके जनाज़ेमें सामिल होनेका सवाब मिलता है.
(११) जो बन्दा अपने वालेदैनकी कब्रकी ज़यारत हर जुम्मा करेगा उस बंदेका सुमार नेक लोगोमे होगा. (हवाला:- मिश्कात शरीफ)
(१२) सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमका इरशाद है के जो बन्दा कब्रस्तानके करीबसे गुज़रे और दस मर्तबा “कुल-होवल्लाहो अहद” की सूरत पढ़े और उसका सवाब मुर्दोको बख्शे तो उस कब्रस्तानके मुर्दोके बराबर उसेभी सवाब मिलेगा. (हज़रतअली करामाल्लाह वजहू)
(१३) जो शख्स कब्रस्तान पहुचकर सूरे फातेहा, कुल-होवल्लाहो अहद और “अलहाको-मुततकासुर” की सूरत पढ़कर यह दुवा मांगे के “आय अल्लाह! अज़वजल, मेने तेरे कलाममेसे जो कुछभी पढ़ा उसका सवाब मोमिन कब्रवालोको बख्शा, तो रोज़े कयामत वोह कब्रवाले अल्लाह तआलाकी बारगाहे सफाअत करनेवाले बनेगे.

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-:: अनमोल मोती – 370 ::-

हज़रात ख्वाजा गरीब नवाज़ तआला अलयहे फरमाते है के…
(१) जूठी कसम खानेवालेके घरसे बरकत उठ जाती है और वोह बर्बाद हो जाता है.
(२) नमाज़ अल्लाह तआलाका कुर्ब हांसिल करनेका ज़रिया है. नमाज़ अल्लाह तआलाकी अमानत है. नमाज़ इमांवालोंकी मेअराज है. नमाज़ अल्लाह अज़वजल और बन्दे के बिचका एक राज़ है.
(३) जो शख्स इबादत नहीं करता समजो के वोह हराम रोज़ी खाता है.
(४) मौत आनेसे पहले आख़ेरतका सामान तैयार करलो, और मौतको हरपाल अपने साथ समजो.
(५) अल्लाह तआला जिस बन्देको अपना दोस्त रखता है उस बन्दे पर तक्लीफोंकी बारिश बरसाता है.
(६) कब्रस्तान नसीहत पानेकी जगह है. कब्रस्तानमे ऊँची आवाज़ मे बात करना, कहना-पीना या कोई दुन्यावी काम करना मना है.
(७) चुप रहना और फिक्रमंद रहना अल्लाह तआलाकी मारेफ़त पानेवालोकी निशानी है.
(८) नेक कामसे बढ़कर नेक लोगोकी सोबत है.
(९) बद-नसीब वोह शख्स है जो गुनाह करे और फिर मकबूल बंदेकी आश रखे.
(१०) गुनाह करनेसे जितना नुकशान होता है उससे कई ज़यादह नुकशान किसी मुसलमान भाईकी बे-इज़्ज़ती करनेसे और उसे हक़ीर जानेसे होता है.
(११) शरीयत की पूरी पाबंदी करनेके बाद बन्दा तरीकत पर पहुंचता है और फिर मारेफ़त और फिर हकीकत तक पहुचता है.
(१२) हररोज़ दो फ़रिश्ते आसमानसे ज़मीन पर उतरते है. एक फरिश्ता काबा शरीफकी छत पर खड़ा होकर ऊँची आवाज़में पुकारता है के अय जिन्नात और इन्सानकी जमात! जो अल्लाह अज़वजलके फर्ज़ोंको अदा नहीं करता वोह अल्लाह तआलाकी पनाह और मोहब्बतसे महरूम रहेता है. दुसरा फरिश्ता सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमके रोज़-ऐ-मुबारकके गुम्बद पर खड़ा होकर बुलंद आवाज़में पुकारता है के अय लोगो! तुममेसे जिसने सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम की सुन्नतोंको छोड़ा वोह सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमकी सफ़आतसे महरूम रहा.
(१३) अल्लाह अज़वजलने किसी बंदगी करने पर इतना वज़न-फ़ोर्स नहीं रखा जितना के नमाज़ अदा करने पर रखा है. नमाज़ एक वादा-वचन है जो वादा पूरा करनेमे कामयाब हो गया उसे सलामती के साथ छुटकारा मिल गया.
(१४) बड़ा गुनाह यह है के फ़र्ज़ नमाज़ वक़्त पर अदा ना हो यानेके नमाज़ क़ज़ा हो जाए और फिर दो फ़र्ज़ नमाज़े एक वक़्तमें पढ़ी जाए.

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