-:: अनमोल मोती – 390 ::-

१. हजरते इब्ने अब्बास रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमने फ़रमाया के जो भी फर्माबरदार बेटा अपने माँ-बापको एक मर्तबा निगाहें मुहबत व् रहमसे देखेगा अल्लाह तआला उसके बदले एक मकबूल हजका सवाब आता फरमाएगा. लोगोने अर्ज़ की के या रसुल्लाह! (सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम) चाहे हर रोज़ सो बार देखे! फ़रमाया, अल्लाह तआला बहुत बड़ा और बहुत तय्यब है. (हवाला:- बैहक़ी शरीफ / मिश्कत शरीफ)
२. हजरते अनस रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमकी बारगाहमें एक शख्सने अर्ज़की के या रसुल्लल्लाह! (सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम) मुज़से एक बड़ा गुनाह हो गया है, क्या मेरी तौबा क़ुबूल हो सकती है? सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमने फ़रमाया के क्या तेरी माँ है? उसने जवाब दिया के नहीं. फिर इरशाद हुवा क्या तेरी कोई खाला है? अर्ज़ किया हा! सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमने फ़रमाया तू उसके साथ हुस्ने सुलूक कर. (इस हदीसे पाक से साबित हुवा के माँ या खाला के साथ हुस्ने सुलूक करनेमें बहुतसे गुनाह मोआफ हो जाते है और उसकी बरकतसे नेकियोकी तौफीक नसीब होती है.
३. माँ-बापके साथ हुस्ने-सुलूककी ताकीद फरमाते हुवे कुर्राने पाकमें फ़रमाया (तर्जुमा:- माँ-बापके साथ हुस्ने सुलूक करो) सही हदीशसे साबित है के औलादके नेक सुलुक्के सबसे ज़यादह हक़दार उसके माँ-बाप है.
४. हज़रते अबू हुरैरह रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के एक शख्स ने दर्याफ्त किया के या रसुल्लाह! (सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम) मेरे हुस्ने सुलुक्का ज़यादह हक़दार कौन? सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमने जवाबमे फ़रमाया के तेरी माँ. उसने पूछा फिर कौन? आपने फ़रमाया तेरी माँ. उसने फिर कहा, फिर कोन? आपने फ़रमाया तेरी माँ. जब उसने चौथी मर्तबा अर्ज़की तो सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमने जवाबमे फ़रमाया, फिर अपने बापके साथ नेक सुलूक कर, जो जितना तुज़से करीब हो.
५. हजरते मिक़्दाम रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमका इरशाद है के ऐ लोगो ! अल्लाह अज़वजल्ल तुमको हुक्म फरमाता है के तुम अपनी माँ के साथ अच्छा सुलूक करो, इसके बाद तुमको यह हुक्म फरमाता है के तुम अपने बाप के साथ अच्छा सुलूक करो. (हवाला:- अब्दुल मुफरिद)
6. हज़रते अब्दुल्लाह बिन मसऊद रदियल्लाहो तआला अन्होसे मर्वी है के उन्होंने सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम से दर्याफ्त किया के कोनसा अमल अल्लाह तआलाको सबसे ज़यादह पसंद है? सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम ने फ़रमाया के वक्त पर नमाज़ अदा करना, उन्होंने पूछा के फिर कोनसा अमल? फ़रमाया अपने माँ-बापके साथ नेकी करना, उन्होंने पूछा फिर कोनसा अमल? फ़रमाया के अल्लाह तआलाकी राहमे जेहाद करना.
६. औलादको यह बात भी कभी नहीं भूलना चाहिए के वोह माँ-बापके साथ अच्छा या बूरा जो सुलूक करेगी वैसा ही सुलूक उनकी औलाद भी उनके साथ करेगी. और यह भी जान ले की वालेदैन के साथ नेक सुलूक करनेमे रिज़्क़में तरक्की और उम्रमे खैर व् बरकत पैदा होगी। यह अल्लाह अज़वजल्लके बरहक़ रसूल और मुहसिने इन्सानियत सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमका इरशाद व् फरमान है, जो हरगिज़ हरगिज़ कभी गलत नहीं हो सकता.
७. औलाद पर बापका हक़ बहुत बड़ा है और माँ का हक़ उससे ज़यादह अज़ीम है. कुर्राने पाकमें अल्लाह तआला ने माँ के बारेमे खुसूसियत व् अहमियत के साथ फ़रमाया के माँ उसे पेटमे रखे रही तकलीफसे, और उसका पेटमे रहना और दूध छूटना तीस महिनेमे है. (हवाला:- पारा-२६ रु.२)

Advertisements
Posted in Uncategorized | Leave a comment

-:: अनमोल मोती – 389 ::-

१. हज़रते मुग़ैरा रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के “बेशक अल्लाह तआलाने तुम लोगो पर माँओ की ना-फ़रमानी हराम फ़रमादी है.” (हवाला:- बुखारी शरीफ)

२.  सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के माँ-बापकी ना-फ़रमानी करनेसे बचो, इस लिए के जन्नतकी खुशबू हज़ार बरसकी राह तक आती है, और माँ-बापकी ना-फ़रमानी करनेवाला उसकी खुश्बू भी न सूंघ सकेगा, और इसी तरह रिश्ता तोड़नेवाला, झीना करनेवाला बूढ़ा शख्स और तकब्बुर से अपनी इजार टखनोसे नीचे लटकानेवाला भी जन्नतकी खुश्बू न पाएगा.

३. हज़रते अबूबकर सिद्दीक रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के  सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमका इरशाद है के “क्या में तुम लोगोको बडे से बड़े गुनाह से खबरदार न करू? सहाबा-ऐ-किरामने अर्ज़ की के ज़रूर आगाह फरमाए. फ़रमाया के अल्लाह तआला के साथ किसी को शरीक ठहराना और माँ-बापकी ना-फ़रमानी करना, यह दोनों सबसे बड़े गुनाह है. फिर आगे फ़रमाया के झूठी गवाही देना भी बहुत बड़ा गुनाह है”. (हवाला:- तिर्मिज़ी शरीफ)

४. जो बद-नसीब लोग माँ-बापकी ना-फ़रमानी करते है और उनका हुक्म नहीं मानते वोह मरनेके बाद जन्नत और उसकी नेअमतोंसे  महरूम रहेंगे.  सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के “मन्नान, माँ-बापका ना-फरमान और शराबी यह तीनो शख्स जन्नतमे दाखिल न होंगे. (हवाला:- निसाई शरीफ)

५. आए दिनका मुशाहदा व् तजुर्बा है के लोग अपनी आंखोसे देखते है के जो लोग अपने माँ-बापकी ना-फ़रमानी करके उनका दिल दुखाते है, अल्लाह तआला उन पर इताब नाज़िल फरमाता है और उनको दुन्या में ही सजा फरमाता है और उन्हें जलील व् रुशवा कर देता है.  सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के “अल्लाह तआला (शिर्क व् कुफ्र के अलावा) जिस गुनाह को चाहे बख्श देगा मगर माँ-बापकी ना-फ़रमानी करनेवालेको नहीं बख्शेगा, बल्कि मरनेसे पहले दुन्यामे भी सजा देगा.

६. हदीशसे साबित है के माँ-बापकी फरमाबरदारी व् खिदमत गुज़री औलाद पर लाज़िम है, औलाद इसे अपने लिए बोज न महसूस करे, बल्कि शरफ़ व् सआदत ख्याल करे. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के ब-मुजीब माँ-बापकी खिदमत नफ्ली इबादतसे अफ़ज़ल व् बेहतर है. हजरते मुआविया सलमी रदियल्लाहो अन्होसे मरवी है के उनके वालिद ने बारगाहे रिसालतमे हाज़िर होकर अर्ज़ की के या रसूलुल्लाह !(सल्लल्लाहो अलयहे व् सल्लम) में जिहाद में जाना चाहता हूँ”  सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम ने फ़रमाया  के तुम्हारी वालिदह ज़िंदा है या नहीं? उन्होंने अर्ज़ की के मेरी वालीदह बा-हयात है. यह सुनकर सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया के तुम माँ की खिदमत अपने ऊपर लाज़िम कर लो, इस लिए के जन्नत माँ के कदमोमे है.

७. एक दूसरी रिवायतमे है के हज़रते अबू सईद खुदरी रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के एक शख्स यमनसे हिजरत करके मदीना मुनव्वरा आ गया. जब सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमको खबर हुई तो उस शख्स को अपने पास बुला कर दरयाफ्त फ़रमाया के यमनमे तुम्हारे रिश्तेदार है या नहीं? उसने अर्ज़ की के वहां मेरे माँ-बाप है. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमने यह सुन कर फ़रमाया के उन्होंने तुम्हे यहाँ आनेकी इज़ाज़त दी है या नहीं? उसने कहा के इज़ाज़त तो नहीं दी है. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमने फ़रमाया के तो फिर तुम यमन वापस जाओ और उनकी खिदमत करो. (हवाला:- अबुदावूद शरीफ)

८. माँ-बेआपकी रज़ा और ख़ुशनूदीसे अल्लाह तबारक व् तआलाकी राजा और ख़ुशनूदी हासिल होती है, और उनकी नाराजगीसे परवरदिगारे आलम ना-खुश और नाराज़ होता है. औलादको सोचना चाहिए और सोचकर खुद ही फैसला करना चाहिए के जिस बंदेसे अल्लाह अज़वजल्ल नाराज हो, उसे फिर दुन्या व् आख़ेरतमे कहा ठिकाना मिलेगा.

९. हज़रते अब्दुल्लाह इब्ने ओमर रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमका इरशाद है के अल्लाह तआला की ख़ुशनूदी बापकी ख़ुशनूदी और उसकी नाराजगी बापकी नाराजगी में है.

१०. हज़रते अबुल दर्दा रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के  सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमका इरशाद है के जन्नतके दरवाजोमेसे बेहतरीन दरवाजा बाप है, तुझे इख्तियार है के तू उसकी हिफाज़त कर या जाएए कर दे. (हवाला:- तिर्मिज़ी शरीफ)

Posted in Uncategorized | Leave a comment

-:: अनमोल मोती – 389 ::-

१. हज़रते मुग़ैरा रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के “बेशक अल्लाह तआलाने तुम लोगो पर माँओ की ना-फ़रमानी हराम फ़रमादी है.” (हवाला:- बुखारी शरीफ)
२. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के माँ-बापकी ना-फ़रमानी करनेसे बचो, इस लिए के जन्नतकी खुशबू हज़ार बरसकी राह तक आती है, और माँ-बापकी ना-फ़रमानी करनेवाला उसकी खुश्बू भी न सूंघ सकेगा, और इसी तरह रिश्ता तोड़नेवाला, झीना करनेवाला बूढ़ा शख्स और तकब्बुर से अपनी इजार टखनोसे नीचे लटकानेवाला भी जन्नतकी खुश्बू न पाएगा.
३. हज़रते अबूबकर सिद्दीक रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमका इरशाद है के “क्या में तुम लोगोको बडे से बड़े गुनाह से खबरदार न करू? सहाबा-ऐ-किरामने अर्ज़ की के ज़रूर आगाह फरमाए. फ़रमाया के अल्लाह तआला के साथ किसी को शरीक ठहराना और माँ-बापकी ना-फ़रमानी करना, यह दोनों सबसे बड़े गुनाह है. फिर आगे फ़रमाया के झूठी गवाही देना भी बहुत बड़ा गुनाह है”. (हवाला:- तिर्मिज़ी शरीफ)
४. जो बद-नसीब लोग माँ-बापकी ना-फ़रमानी करते है और उनका हुक्म नहीं मानते वोह मरनेके बाद जन्नत और उसकी नेअमतोंसे महरूम रहेंगे. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के “मन्नान, माँ-बापका ना-फरमान और शराबी यह तीनो शख्स जन्नतमे दाखिल न होंगे. (हवाला:- निसाई शरीफ)
५. आए दिनका मुशाहदा व् तजुर्बा है के लोग अपनी आंखोसे देखते है के जो लोग अपने माँ-बापकी ना-फ़रमानी करके उनका दिल दुखाते है, अल्लाह तआला उन पर इताब नाज़िल फरमाता है और उनको दुन्या में ही सजा फरमाता है और उन्हें जलील व् रुशवा कर देता है. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के “अल्लाह तआला (शिर्क व् कुफ्र के अलावा) जिस गुनाह को चाहे बख्श देगा मगर माँ-बापकी ना-फ़रमानी करनेवालेको नहीं बख्शेगा, बल्कि मरनेसे पहले दुन्यामे भी सजा देगा.
६. हदीशसे साबित है के माँ-बापकी फरमाबरदारी व् खिदमत गुज़री औलाद पर लाज़िम है, औलाद इसे अपने लिए बोज न महसूस करे, बल्कि शरफ़ व् सआदत ख्याल करे. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के ब-मुजीब माँ-बापकी खिदमत नफ्ली इबादतसे अफ़ज़ल व् बेहतर है. हजरते मुआविया सलमी रदियल्लाहो अन्होसे मरवी है के उनके वालिद ने बारगाहे रिसालतमे हाज़िर होकर अर्ज़ की के या रसूलुल्लाह !(सल्लल्लाहो अलयहे व् सल्लम) में जिहाद में जाना चाहता हूँ” सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम ने फ़रमाया के तुम्हारी वालिदह ज़िंदा है या नहीं? उन्होंने अर्ज़ की के मेरी वालीदह बा-हयात है. यह सुनकर सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया के तुम माँ की खिदमत अपने ऊपर लाज़िम कर लो, इस लिए के जन्नत माँ के कदमोमे है.
७. एक दूसरी रिवायतमे है के हज़रते अबू सईद खुदरी रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के एक शख्स यमनसे हिजरत करके मदीना मुनव्वरा आ गया. जब सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमको खबर हुई तो उस शख्स को अपने पास बुला कर दरयाफ्त फ़रमाया के यमनमे तुम्हारे रिश्तेदार है या नहीं? उसने अर्ज़ की के वहां मेरे माँ-बाप है. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमने यह सुन कर फ़रमाया के उन्होंने तुम्हे यहाँ आनेकी इज़ाज़त दी है या नहीं? उसने कहा के इज़ाज़त तो नहीं दी है. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमने फ़रमाया के तो फिर तुम यमन वापस जाओ और उनकी खिदमत करो. (हवाला:- अबुदावूद शरीफ)
८. माँ-बेआपकी रज़ा और ख़ुशनूदीसे अल्लाह तबारक व् तआलाकी राजा और ख़ुशनूदी हासिल होती है, और उनकी नाराजगीसे परवरदिगारे आलम ना-खुश और नाराज़ होता है. औलादको सोचना चाहिए और सोचकर खुद ही फैसला करना चाहिए के जिस बंदेसे अल्लाह अज़वजल्ल नाराज हो, उसे फिर दुन्या व् आख़ेरतमे कहा ठिकाना मिलेगा.
९. हज़रते अब्दुल्लाह इब्ने ओमर रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमका इरशाद है के अल्लाह तआला की ख़ुशनूदी बापकी ख़ुशनूदी और उसकी नाराजगी बापकी नाराजगी में है.
१०. हज़रते अबुल दर्दा रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमका इरशाद है के जन्नतके दरवाजोमेसे बेहतरीन दरवाजा बाप है, तुझे इख्तियार है के तू उसकी हिफाज़त कर या जाएए कर दे. (हवाला:- तिर्मिज़ी शरीफ)

Posted in Uncategorized | Leave a comment

-:: अनमोल मोती-388 ::-

माँबापके दर्जात व् हुकूक

  1. औलाद पर फ़र्ज़ है के वोह अपने वालेदैन की ताज़ीम व् तकरीम बजा लाए. उनकी खिदमत गुज़री करे, उनके साथ उठते-बैठते, चलते-फिरते और बातचीत वगैरा में अदब व् एहतरामको मद्दे नज़र रखे. इसी तरह कुर्राने पाक और हदीस शरीफ में माँ-बाप के जो हुकूक व् दरजात बयान किये गए है उनको अदा करनेमे जरासी भी कोताही व् गफलत न करे. हर जाएज़ काममे वालिदैनके हुक्मकी फरमाबरदारी करे. अगर वालिदैन औलाद पर कुछ जबर व् ज्यादती भी करे तब भी औलाद माँ-बापका दिल न दुखाए. अगर उनकी कोई जरुरत हो तो जान व् माल से उनकी खिदमत करके उनको खुश करे. अगर माँ-बाप अपनी जरूरतसे औलादके माल व् सामान मे से कोई चीज़ ले ले, तो ख़बरदार! हरगिज़ बुरा न माने ना तो इस पर नाराजगी जाहिर करे, बल्कि ये समझे के वो और उसका सब माल व् सामान माँ-बाप ही का है.
  2. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो तआला अलयहे वसल्लमने एक शख़्स से फ़रमाया की तू और तेरा माल सब तेरे बापका है.
  3. अल्लाह अज़वजल्ल कुर्राने पाकमें इरशाद फरमाता है के माँ-बाप के साथ अच्छा सुलूक करो, अगर तेरे सामने माँ-बाप में से एक या दोनों बुढ़ापेको पहुंच जाए तो उनके सामने “उफ़” तक न कहना, और उन्हें न झिड़कना और उनसे ताजीम की बात कहना। उनके लिए नरम दिलीसे अर्ज़ करते रहना, के ऐ मेरे रब ! तू इन दोनों पर रहम फरमा जैसा की इन दोनोने मुझे छोटेपन में पाला. (हवाला:- पारा-९५, रुकूअ-३)
  4. माँ-बाप को उनका नाम लेकर न पुकारे के यह ख़िलाफ़े अदब है और इसमें इनकी दिल-आजारी है.
  5. वालेदैनसे इस तरह बात करे जैसे गुलाम व् खादिम (अदब व् नियाज्मंदीसे) आकासे कलाम करते है.
  6. माँ-बाप काफिर हो तो उनके लिए हिदायत व् ईमानकी दुवा करे के यही उनके हक़मे रहमत है. (हवाला:- कंज़ुल ईमान)
  7. एक दूसरी आयातमे अल्लाह अज़वजल्ल इरशाद फरमाता है के “और माँ-बापके साथ भलाई करो” (हवाला:- सुर-ऐ-बकरा, पा-९ रुकूअ-९०)
  8. अल्लाह अज़वजल्ल इरशाद फरमाता है के अपने माँ-बापसे भलाई कर और वोह अगर तुज़से यह कोशिश करे के तू उसे मेरा शरीक ठहरारए, जिसका तुझे इल्म नहीं तो उनका कहना न मन, (हवाला:- पारा-२० रुकूअ-१३)
  9. औलाद पर माँ -बापकी फरमाबरदारी और इताअत गुज़ारी लाज़िम है. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो तआला अलयहे वसल्लमने इसकी सख्त ताकीद फ़रमाई और मुसलमानोंको हुक्म दिया के वोह अपने वालेदैनका हुक्म बजा लाए और उनकी हुक्म आलूदी व् ना- फ़रमानी करके अपनी दुन्या व् आख़िरत बर्बाद न करे.
  10. हज़रत अब्दुल्ला बिन ओमर रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के एक रोज़ उन्होंने बारगाहे रिसालतमे अर्ज़ की या रसूलल्लाह ! (सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम) मेरी एक बीवी है जिससे मुझे बे-पनाह मुहब्बत है, लेकिन मेरे वालीद (हज़रत फ़ारुके आज़म रदियल्लाहो तआला अन्हो) उसे मेरे लिए पसंद नहीं फरमाते और मुझे मजबूर करते है के उसे तलाक दे दू. यह सुनकर सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो तआला अलयहे वसल्लमने फ़रमाया “ऐ अब्दुल्लाह तुम उसको तलाक दे दो”. (हवाला:- तिर्मिज़ी शरीफ व् अबुदावूद शरीफ)
  11. हज़रते अबू उमामा रदियल्लाहो तआला अन्होसे मरवी है के एक शख्स ने सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो तआला अलयहे वसल्लमकी ख़िदमतमे हाज़िर होकर अर्ज़ की के या रसूलल्लाह ! (सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम) औलाद पर माँ-बाप का क्या हक़ है? इरशाद फ़रमाया के माँ-बाप तेरे लिए जन्नत भी है और दोज़क भी.(इसका मतलब यही है के औलाद फरमाबरदारी व् खिदमत गुज़री करके जन्नतके मुस्तहिक़ होगी और ना-फ़रमानी करके जहन्नम के अज़ाब में डाली जाएगी.)

 

Posted in Uncategorized | Leave a comment

-:: अनमोल मोती – 387 ::-

પરિવર્તન યાત્રા

મુસ્લિમ સમાજની સાંપ્રત પરિસ્થિતિ ખુબજ ખરાબ છે જે આપણે સૌ જાણીયે જ છીએ. તેનું મુખ્ય કારણ અલ્લાહ તઆલા આપણાથી સખ્ત નારાજ છે.  આ નારાજગી દિવસે ને દિવસે વધતી જ જાય છે. આપણા મુસ્લિમ સમાજના બધાજ ફીરકાઓમાં છેલ્લા વર્ષોમાં ધાર્મિક કાર્યક્ર્મોનો ઘણા મોટા પ્રમાણમાં વધારો થયો હોવા છતાં  આપણી પરિસ્થિતિ સુધારવાને બદલે વધુ ને વધુ બગડતી જાય છે. તેનું કારણ શું?

મારા મત અને મારી સમજણ મુજબ ઇસ્લામ ધર્મમાં કુરાને પાક અને સરકારએ દોઆલમ સલ્લલ્લાહો અલયહે વસલ્લમના આદેશોમાં સૌથી વધુ કોઈ બાબત ઉપર ભાર મુક્યો હોય તો તે પાક અખ્લાક એટલે કે સદ્ચારિત્ર્ય.  સરકારનું સમગ્ર જીવન પાક અખ્લાક (સદ્ ચારિત્રય) નો બેમિશાલ નમૂનો છે.

હવે આપણે જાતે જ નક્કી કરવાનું છે કે આપણામાં પાક અખલાકનું પ્રમાણ કેટલું ઓછું અને બદ-અખલાકનું પ્રમાણ કેટલું વધારે છે. આ બાબતે આપણે જાતે જ ચિંતન અને મનન કરવું પડે. આવા દુષિત વાતાવરણ માંથી બહાર નીકળવા સમગ્ર મુસ્લિમ સમાજનો દરેક વ્યક્તિ પછી તે વેપારી હોય, કર્મચારી હોય, શિક્ષિત હોય, પીરે તારિકત હોય, મૌલાન હોય કે સામાન્ય મુસ્લિમ. બધાએ સારા ઉમદા પરિવર્તન માટે વિચાર-વિમર્શ કરવાનો અને તેની ઉપર અમલ કરવાનો સમય પાકી ગયો છે.

આ બધો બદલાવ આપણે જાતેજ લાવવો પડે. અલ્લાહ તઆલા કુર્રાનેપાકમાં ફરમાવે છે કે તમે જેવું કરશો તેવું પામશો, મારો ઇન્સાફ અદલ છે. માટે અલ્લાહ તઆલાને રાજી કરવાનો સૌથી સરળ અને શ્રેષ્ઠ તરીકો (માર્ગ)પાક અખ્લાકથી જીવન પસાર કરવું. P VFEFZ

Posted in Uncategorized | Leave a comment

-:: अनमोल मोती – 385 ::

मौत की तकलीफ क्या है?

  1. हज़रत हसन रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमने मौत, उसका दर्द और मौतकी तबाहिका ज़िक्र करते हुवे फ़रमाया के मौतके वकत तलवारके 300 वारके बराबर तकलीफ होती है.
  2. आसान तरीन मौत के बारेमे सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमने फ़रमाया के आसान तरीन मौत एक उनमे लिपटी हुई कांटेदार डालीकी तरह है. जब वोह कांटे दार डालीको खींचा जाए तो उसके साथ कुछ न कुछ उन भी खींचा चला आता है.
  3. हज़रात अली रदियल्लाहो तआला उन्होने लोगोको जेहदमे शामिल होनेका दर्श देते हुवे फ़रमाया के अगर तुम जेहादमे शामिल होंगे तब भी तुम्हारा मरना लाज़मी है. कसम परवर्दिगारकी ! जंगके मेदान में तलवारके हज़ार वार बिस्तर पर मरनेसे ज़यादह आसान है.
  4. इमाम अवजाइ रहमतुल्लाह तआला अलयहेका कॉल है के मुर्दा कबरसे उठनेके वकत तक मौतकी कडवास महसूस करता रहेगा.
  5. जनाब शदाद इब्ने आवास रहतुल्लाह तआला अलयहेका कॉल है के मौत मोमिनके लिए दुन्या और आख़ेरतके तमाम ख़ौफ़मे सबसे ज़यादह हिम्मत तोड़नेवाला है. अगर किसीको आरिसे चिरनेमे आए, केंचीसे उसके अअज़ा कतरनेमे आए और गरम पानी से भरे  देगमे उबालनेमे आए और जो तकलीफ हो उससे भी ज़यादह तकलीफदेह है. अगर कोई मुर्दा ज़िंदा होकर दुन्या वालोको मौतकी तकलीफकी खबर सूना दे तो लोग जिंदिगी की लज़्ज़तको भूल जाए और कभी चेनसे सो न सके.
  6. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमका इरशाद है के मौत मोमिनके लिए राहत और गुनाहगार के लिए जेहमत (तकलीफ) का सबब है.
  7. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के मैयत के बालोमेसे अगर एक बाल भी ज़मीन पर रहनेवालो पर रख दिया जाए तो सारे के सारे मर जाए, क्यों के मैयत के हर बालमे मौत होती है, और अगर मौत किसी चीज़ पर छा जाए तो वोह चीज़ फना हो जाती है.
  8. रिवायत है के मौतकी एक बूंद दुनियाके पहाड़ो पर रख दी जाए तो सारे पहाड़ पिघल जाए.
  9. हज़रत ओमर रदियल्लाहो रायला उन्होने हज़रत कअब रदियल्लाहो तआला अन्होसे कहा के मौत की तकलीफ के बारेमे कहो. हज़रत कअब रदियल्लाहो तआला अन्हो ने कहा के अमीरुल मोमेनीन ! मौत एक ऐसी डालीकी तरह है जिसमे कई कांटे भरे हो, और वोह डाली इंसानके जिसम्मे पेवस्त की जाए और उस डालिको कोई शख़्स खूब सख्ती के साथ खींचे जो थोड़ी बाहिर और थोड़ी जिस्मके अंदर रहे. और जो तकलीफ हो ऐसी तकलीफ मौतके वक्त होती है.
  10. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के तुमसे कोई शख्स तब तक दुन्यासे अलविदा नहीं होता जब तक वोह अपना ठिकाना न देखले, जन्नतमे या दोज़खमें.
  11. जनाब वहबी रहमतुल्ला तआला अलयहे फरमाते है के इन्सानकी मौतके वकत आमाल लिखनेवाले फ़रिश्ते कहते है के जो मरनेवाला नेक अमल करनेवाला होगा तो वोह फ़रिश्ते कहेगे के अल्लाह तआला तुझे हमारी तरफसे भला बदला दे के तूने हमें बेहतरीन मज्लिसोमे बिठाया और कई नेक काम लिखने को दिए. और जो मरनेवाला गुनाहगार होगा तो फ़रिश्ते कहते है के अल्लाह तआला तुझे हमारी तरफसे अच्छा बदला न दे, के तूने हमें कई बुरी मज्लिसोमे बिठाया और गुनाह और गन्दी बाते सुननेको मजबूर किया. अल्लाह तआला तुझे बेहतर बदला न दे. तब मरनेवालेकी आंखे खुली की खुली रह जाती है और वोह अल्लाह तआलाके फ़रिश्तोंके सिवा किसी चीज़को देख नहीं सकता.
Posted in Uncategorized | Leave a comment

-:: अनमोल मोती – 386 ::-

  1. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के जब मैयतको कब्रमे उतारा जाता है तब कब्र मुर्दे को कहती है के अय इन्सान! तुज पर अफ़सोस है! तुजे मुझसे किस चीज़ने धोकेमे रखा? क्या तुझे मालूम नहीं था के में आजमाइशों, अंधेरो, तन्हाइयो और कीड़े-मकोडोका घर हूँ? जब तू मेरे आस-पास से गुज़रा करता था तब तुझे किस तकब्बुरने घेर रखा था? अगर मैयत नेक हो तो जवाब देनेवाला कबरको जवाब देता है के क्या तुझे मालूम नहीं के यह शख्स भलाइओ-नेकियों का हुक्म देता था और बुराइओंसे रोकता था? तब कब्र जवाब देती है के तब तो में इस मैयत के लिए बागमे तब्दील हो जाऊगी। इस मैयतका जिस्म नूरानी बन जाएगा, और इसकी रूह अल्लाह तआलाकी रहमतके कुर्बमे दाखिल होगी.
  2. 2. ओबैद इब्ने उमेर लुईसी रहमतुल्लाह तआला अलयहे से रिवायत है के जब किसी शख्सकी मौत होजाती है तब ज़मीन का वोह टुकड़ा जिसमे उस मैयतको दफ़न होना होता है पुकारता है के में अंधेरो और तन्हाइओका घर हूँ, अगर तू अपनी ज़िंदगीमे नेक अमल करता रहा होगा तो आज में तुजपार सरापा रहमत बन जाऊंगी, और अगर तू ना-फरमान रहा होगा तो आज में तेरे लिए सजा बन जाऊंगी. में वोह हूँ जो मेरे अंदर हक़ तआलाका फर्माबरदार बन कर आता है तो वोह खुश होकर निकलता है और जो ना-फरमान बन कर आता है ज़लील हो कर बाहिर निकलता है.
  3. एक रिवायत में है के मैयत को जब कब्रमे रख्खा जाता है तब उसके अमल जमा होते है, फिर अल्लाह तआला उन्हें बोलनेकी ताकत अता फरमाता है, तब वोह आमाल कहते है के अय कबरका अकेला इंसान! तेरे सारे रिस्तेदार और दोस्त तुज़से अलग हो गए. आज हमारे सिवा कोई साथी नहीं है.
  4. हज़रत कअब रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के जब नेक इन्सानको कब्रमे रखा जाता है तब उसके नेक अमल नमाज़, रोज़ा, हज, जेहाद, सदका वगैरह उसके करीब जमा हो जाते है. जब अज़ाब देने वाले फरिश्ते उसके पैर की तरफसे आगे बढ़ते है तो नमाज़ कहती हे के दूर हो जाओ, यहाँ तुम्हारा कोई काम नहीं है, क्यों के यह इन्सान दुन्यामे अल्लाह तआलाकी इबादत करता रहता था. फिर सरकी तरफसे फरिस्ते आते है तो रोज़ा कहता है के तुम्हारे लिए इस तरफ कोई रास्ता नहीं है क्यों के यह बंदा दुन्यामे अल्लाह तआला की ख़ुशी हांसिल करने के लिए रोज़े रखा करता था. इस तरह हज, सदका वगैरह उन फ़रिश्तोको अज़ाब देनेसे रोकते है. फिर मैयत को कहा जाता है के तेरी ज़िंदगी और मौत दोनों बेहतरीन है. फिर रहमत के फ़रिश्ते उसके लिए कब्रमे जन्नतका बिछोना बिछाते है और उसे जन्नती लिबास दिया जाता है, जहा तक नज़र पहोचे कब्र चौड़ी कर दी जाती है. जन्नत के एक कंदील (फानूस) से उसकी कब्र रोशन कर दी जाती है, जिसके ज़रिये रोज़े-कयामत तक वोह रौशनी हांसिल करता रहेगा.
  5. हज़रत मुहम्मद इब्ने अली रहमतुल्लाह तआला अलयहे से रिवायत है के हर मरनेवालेके सामने उसके अच्छे और बुरे अमल पेश किये जाते है, तब वोह नेक अमल की तरफ टिकटिकी लगाकर देखा करता है और बुरे आमलकी तरफसे आंखे फेर लेता है.
  6. जनाब मुहम्मद इब्ने सबीह रहमतुल्लाह तआला अलयहे फरमाते है के मेरे तक यह रिवायत पहुंची है के जब मैयत को कब्रमे रखा जाता है और अज़ाब दिया जाता है तो उसके नज़दीक के मुर्दे कहते है के भइओ, पड़ओसिओ फिर दुन्यामे रहनेवालो! क्या हमारे दुन्यासे चले जानेसे तुमने कोई नशीहत हासिल न की, हमारा मरके कब्रमे दफ़न होजाना तुम्हारे लिए गोरो-फ़िक्र की बात नहीं थी? तुमने हमारे मरनेके बाद हमारे अमल खत्म होते तो देखे, मगर तुम्हे अमल करनेकी मोहलत मिली उस मोहलत को तुमने गनीमत न जानी, और नेक अमल नहीं किये? तूने अपने रिस्तेदारोंसे कोई नशीहत नहीं ली जो दुन्यावी नेअमतों पर गुरुर करते थे और तेरी नजरके सामने मेरे पेटमे गुम हो गए? उनकी मौत उन्हें कब्रमे ले आई, उन्हें कंधो पर सवार होकर आखरी मंज़िल पर आते हुवे तूने देखा जहासे बच कर निकल जानेका कोई रास्ता नहीं.
  7.  हज़रत अबू हुरैरह रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के जब मोमिनकी मौतका वकत करीब आता है तब फ़रिश्ते रेशमके एक कपडेमें मुश्क और नाजबूकी डालिया लेकर हाज़िर होते है जन्नतकी इन चीज़ोको देख कर मोमिनकी रूह आसानीसे निकल जाती है जैसे की आटे से बाल. और उसे कहा जाता है के मुत्मइन नफ़स! तेरे रबकी तरफ ख़ुशी ख़ुशी लोट जा..
Posted in Uncategorized | Leave a comment