-:: अनमोल मोती – 386 ::-

  1. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के जब मैयतको कब्रमे उतारा जाता है तब कब्र मुर्दे को कहती है के अय इन्सान! तुज पर अफ़सोस है! तुजे मुझसे किस चीज़ने धोकेमे रखा? क्या तुझे मालूम नहीं था के में आजमाइशों, अंधेरो, तन्हाइयो और कीड़े-मकोडोका घर हूँ? जब तू मेरे आस-पास से गुज़रा करता था तब तुझे किस तकब्बुरने घेर रखा था? अगर मैयत नेक हो तो जवाब देनेवाला कबरको जवाब देता है के क्या तुझे मालूम नहीं के यह शख्स भलाइओ-नेकियों का हुक्म देता था और बुराइओंसे रोकता था? तब कब्र जवाब देती है के तब तो में इस मैयत के लिए बागमे तब्दील हो जाऊगी। इस मैयतका जिस्म नूरानी बन जाएगा, और इसकी रूह अल्लाह तआलाकी रहमतके कुर्बमे दाखिल होगी.
  2. 2. ओबैद इब्ने उमेर लुईसी रहमतुल्लाह तआला अलयहे से रिवायत है के जब किसी शख्सकी मौत होजाती है तब ज़मीन का वोह टुकड़ा जिसमे उस मैयतको दफ़न होना होता है पुकारता है के में अंधेरो और तन्हाइओका घर हूँ, अगर तू अपनी ज़िंदगीमे नेक अमल करता रहा होगा तो आज में तुजपार सरापा रहमत बन जाऊंगी, और अगर तू ना-फरमान रहा होगा तो आज में तेरे लिए सजा बन जाऊंगी. में वोह हूँ जो मेरे अंदर हक़ तआलाका फर्माबरदार बन कर आता है तो वोह खुश होकर निकलता है और जो ना-फरमान बन कर आता है ज़लील हो कर बाहिर निकलता है.
  3. एक रिवायत में है के मैयत को जब कब्रमे रख्खा जाता है तब उसके अमल जमा होते है, फिर अल्लाह तआला उन्हें बोलनेकी ताकत अता फरमाता है, तब वोह आमाल कहते है के अय कबरका अकेला इंसान! तेरे सारे रिस्तेदार और दोस्त तुज़से अलग हो गए. आज हमारे सिवा कोई साथी नहीं है.
  4. हज़रत कअब रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के जब नेक इन्सानको कब्रमे रखा जाता है तब उसके नेक अमल नमाज़, रोज़ा, हज, जेहाद, सदका वगैरह उसके करीब जमा हो जाते है. जब अज़ाब देने वाले फरिश्ते उसके पैर की तरफसे आगे बढ़ते है तो नमाज़ कहती हे के दूर हो जाओ, यहाँ तुम्हारा कोई काम नहीं है, क्यों के यह इन्सान दुन्यामे अल्लाह तआलाकी इबादत करता रहता था. फिर सरकी तरफसे फरिस्ते आते है तो रोज़ा कहता है के तुम्हारे लिए इस तरफ कोई रास्ता नहीं है क्यों के यह बंदा दुन्यामे अल्लाह तआला की ख़ुशी हांसिल करने के लिए रोज़े रखा करता था. इस तरह हज, सदका वगैरह उन फ़रिश्तोको अज़ाब देनेसे रोकते है. फिर मैयत को कहा जाता है के तेरी ज़िंदगी और मौत दोनों बेहतरीन है. फिर रहमत के फ़रिश्ते उसके लिए कब्रमे जन्नतका बिछोना बिछाते है और उसे जन्नती लिबास दिया जाता है, जहा तक नज़र पहोचे कब्र चौड़ी कर दी जाती है. जन्नत के एक कंदील (फानूस) से उसकी कब्र रोशन कर दी जाती है, जिसके ज़रिये रोज़े-कयामत तक वोह रौशनी हांसिल करता रहेगा.
  5. हज़रत मुहम्मद इब्ने अली रहमतुल्लाह तआला अलयहे से रिवायत है के हर मरनेवालेके सामने उसके अच्छे और बुरे अमल पेश किये जाते है, तब वोह नेक अमल की तरफ टिकटिकी लगाकर देखा करता है और बुरे आमलकी तरफसे आंखे फेर लेता है.
  6. जनाब मुहम्मद इब्ने सबीह रहमतुल्लाह तआला अलयहे फरमाते है के मेरे तक यह रिवायत पहुंची है के जब मैयत को कब्रमे रखा जाता है और अज़ाब दिया जाता है तो उसके नज़दीक के मुर्दे कहते है के भइओ, पड़ओसिओ फिर दुन्यामे रहनेवालो! क्या हमारे दुन्यासे चले जानेसे तुमने कोई नशीहत हासिल न की, हमारा मरके कब्रमे दफ़न होजाना तुम्हारे लिए गोरो-फ़िक्र की बात नहीं थी? तुमने हमारे मरनेके बाद हमारे अमल खत्म होते तो देखे, मगर तुम्हे अमल करनेकी मोहलत मिली उस मोहलत को तुमने गनीमत न जानी, और नेक अमल नहीं किये? तूने अपने रिस्तेदारोंसे कोई नशीहत नहीं ली जो दुन्यावी नेअमतों पर गुरुर करते थे और तेरी नजरके सामने मेरे पेटमे गुम हो गए? उनकी मौत उन्हें कब्रमे ले आई, उन्हें कंधो पर सवार होकर आखरी मंज़िल पर आते हुवे तूने देखा जहासे बच कर निकल जानेका कोई रास्ता नहीं.
  7.  हज़रत अबू हुरैरह रदियल्लाहो तआला अन्होसे रिवायत है के सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के जब मोमिनकी मौतका वकत करीब आता है तब फ़रिश्ते रेशमके एक कपडेमें मुश्क और नाजबूकी डालिया लेकर हाज़िर होते है जन्नतकी इन चीज़ोको देख कर मोमिनकी रूह आसानीसे निकल जाती है जैसे की आटे से बाल. और उसे कहा जाता है के मुत्मइन नफ़स! तेरे रबकी तरफ ख़ुशी ख़ुशी लोट जा..
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About aelan

નામ : અબ્દુલ રશીદ મુનશી જન્મ તારીખ : ૧૫/૦૭/૧૯૫૪ જન્મ ભૂમિ : જુનાગઢ (Saurashtra) Gujarat-India અભ્યાસ : એમ.એ., બી.એડ. એલ.એલ.બી. વ્યવસાય : ઓફીસ અધ્યક્ષ સ્થળ : સ્વામી વિવેકાનંદ વિનય મંદિર, જુનાગઢ. મોબાઈલ નંબર : ૦૯૪૨૮3૭૮૬૬૪ ઈ-મેલ : arashidmunshi@gmail.com
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