-:: अनमोल मोती – 373 ::-

वालेदैन के हुकूक उनकी वफात के बाद
आला हज़रात मुजद्दीदी दीनो मिल्लत इमाम अहमद राजा रहमतुल्लाह तआला अलयहे को किसीने सवाल किया के वालेदैन की वफात के बाद औलाद पर उनके कोनसे हुक़ुक़ बाकी रहते है? आपने जवाब दिया के पहला हक़ उनकी वफातके बाद फ़ौरन जनाज़े की तयारी, ग़ुस्ल, कफ़न, नमाज़े जनाज़ा और दफ़न.
१. उनके लिए दुवा-अस्तग़फ़ार करते रहना इसमें कभी चूंक ना करना.
२. सदकात, खैरात, और नेक अमल करके वालेदेनको सवाब पहोचाते रहना. अपनी नमाज़ के साथ उनके लिए भी नमाज़ पढ़ना, रोज़ा रखना बल्कि जो कुछ भी नेक काम करो उसका सवाब वालेदैन और तमाम मरहमिनोको पहुचते रहना ताके उनको सवाब पहुचता रहेगा और खुदके सवाबमे कोई कमी नहीं होगी.
३. वालेदैन पर अगर कोई क़र्ज़ बाकी रहा गया हो तो उस क़र्ज़ को अदा करनेकी ज़यादह से ज़यादह कोशिश करनी चाहिए. अपने मालमेसे वालेदेनका क़र्ज़ अदा करनेमे दोनों जहान की भलाई है. अगर औलाद वालेदेनका क़र्ज़ अदा करनेकी ताकत ना रखती हो तो उसे रिस्तेदारोंसे और नेक लोगोसे इमदाद लेनेमेभी कोई हर्ज़ नहीं है. .
४. वालेदैन पर कोई फ़र्ज़ बाकी रहा गया हो तो अपनी ताकत के मुताबिक़ अदा करनेकी कोशिश करते रहना चाहिए. मसलन वालेदैन पर हज फ़र्ज़ बाकी रह गया हो तो उनके बदले हज करो या हज्जो बदल करवालो. वालेदैन पर ज़कात अदा करना बाकी रह गया हो तो उनकी तरफसे ज़कात अदा करे. नमाज़ या रोज़ा बाकी रह गया हो तो उसका कफ़्फ़ारा अदा करे. इस तरह वालेदैन की नजातकी हर मुमकिन कोशिश करते रहना चाहिए.
५. वालेदैनने जो जाएज़ वसीहत की हो तो जहां तक हो शेक पूरी करनेकी कोशिश करनी चाहिए.
६. वालेदैनकी कसम उनकी वफात के बाद भी बाकी रखनी चाहिए। हर जाएज़ कामोमे उनकी वफातके बाद भी उनकी मर्ज़ीका पाबन्द रहना चाहिए.
७. हर जुम्मा को वालेदैन की कब्रकी ज़यारत करना, उनकी कब्रके पास यासीन शरीफ की तिलावत करना, अगर रास्ते चलते उनकी कब्र तो सलाम और फातेहा पढ़े बगैर आगे ना बढे.
८. वालेदैन के रिस्तेदारोके साथ हंमेशा के लिए अच्छा सुलूक करना, उनके दोस्तों के साथ दोस्ती निभाना, और उनके दोस्तोंकी इज़्ज़त करना.
९. कभी भी किसीके वालेदैन को बुरा ना कहना ताकि कोई तुम्हारे माँ-बाप को भला-बुरा कहे.
१०. कभीभी किसी गुनाहमे सामिल होकर वालेदैन को उनकी कब्रमे तकलीफ ना पहुचाए। क्योके हमारे सारे अआमालकी खबर वालेदैन को उनकी कब्रमे पहुचती रहती है. जब हम नेक अमल करते है तो वोह कब्रमे खुश होते है और हमारे गुनाह करने पर वोह दुखी होते है, उन्हें ठेस पहुचती है. औलाद को यह हक़ नहीं पहुचता के वोह अपने वालेदेनको उनकी कब्रमे तकलीफ पहुचाए.
११. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के वालेदैन के साथ अच्छा सुलूक करनेमे उनकी वाफात के बाद उनकी मग़फ़ेरतकी दुवा करना भी सामिल है.
१२. कोई बंदा अगर नफ़्ल खैरात करे तो उसे चाहिए के वोह खैरात अपने वालेदैन की तरफसे करे ताकि उसका सवाब उनको भी मिले इस अमलसे उसके खुदके सवाबमें कोई कमी न आएगी.
१३. जब बन्दा वालेदैनके हकमे दुवा करना छोड़ देता है तो उसके रिज़क़मे कमी आजाती है.
१४. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के जो बंदा अपने माँ-बापकी तरफसे हज करता है या उनका क़र्ज़ अदा करता है या उनकी कब्रकी हर जुम्मा ज़यारत करता है तो उसे रोज़े क़यामत नेक लोगोके साथ उठाया जाएगा. माँ-बाप की तरफसे किया हुवा हज अल्लाह तआला कुबूल फरमाता है और उनकी रूह आसमानमे खुश होती है और ऐसा बन्दा वालेदैनके साथ अच्छा सुलूक करनेवाला लिखा जाता है. और उसे दस हज करनेका सवाब मिलता है.
१५. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के जो बन्दा वालेदैनकी हयाती के बाद उनकी कसम पूरी करे, उनका क़र्ज़ अदा करे, दूसरोके माँ-बाप को भला-बूरा कहकर अपने माँ-बाप को भला-बुरा न कहलवाए उस बंदेको वालेदेनका फरमाबरदार लिखा जाता है फिर चाहे वोह उनकी हयातीमे ना-फरमान भले ही हो. और जो बंदा माँ-बाप की कसम पूरी न करे, उनका क़र्ज़ अदा ना करे, दूसरोके माँ-बापको भला-बूरा कहकर अपने वालेदैनको भला-बुरा कहलवाए तो ऐसे बंदेको माँ-बापका ना-फरमान लिख दिया जाता है, फिर भले ही वोह अपने माँ-बापकी हयातीमे उनका फरमाबरदार हो.
१६. सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के जो बंदा जुम्माके दिन अपने वालेदैन या उनमेसे किसी एक की कब्रकी ज़यारत करे और वहां बैठ कर यासीन शरीफ की तिलावत करे तो उस बंदे को बख्स दिया जाता है.
१७. जो बन्दा सवाबकी नियतसे अपने वालेदैन या दोनोंमेसे एक की कब्र की ज़यारत करे तो उसे मकबूल हजका सवाब मिलता है और जो बन्दा बार-बार अपने वालेदैन या दोनोंमेसे किसी एक की कब्रकी ज़यारत करे तो उसकी अपनी कब्र की ज़यारत करनेके लिए फ़रिश्ते तशरीफ़ लाते है.

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નામ : અબ્દુલ રશીદ મુનશી જન્મ તારીખ : ૧૫/૦૭/૧૯૫૪ જન્મ ભૂમિ : જુનાગઢ (Saurashtra) Gujarat-India અભ્યાસ : એમ.એ., બી.એડ. એલ.એલ.બી. વ્યવસાય : ઓફીસ અધ્યક્ષ સ્થળ : સ્વામી વિવેકાનંદ વિનય મંદિર, જુનાગઢ. મોબાઈલ નંબર : ૦૯૪૨૮3૭૮૬૬૪ ઈ-મેલ : arashidmunshi@gmail.com
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