-:: अनमोल मोती – 371 ::-

हज़रत इमाम जेनुल आबेदीन रदियल्लाहो तआला अन्हो अपने चहीते बेटे इमाम बाकिर रहमतुल्लाह तआला अलयहेको नशीहत फरमाते है के पांच किस्मके लोगोसे दोस्ती नहीं रखना.
(1) फ़ासिक़ और खुलेआम गुनाह करनेवालेसे, जो तुम्हे कोडीओके दाम बेच देगा. ऐसे लोग बहुत लालची होते है, ऐसे गुनाह करनेवाले लोग अल्लाह तआला और सरकार दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमकी नाफरमानी करनेमे शर्म नहीं महसूस करते तो भला वोह तम्हारी क्या फ़िक्र करेगे.
(२) जुठ बोलनेवालेसे भी दोस्ती ना करना क्योके वोह भरोसेमंद नहीं होते, वोह फरेबी दुरका नज़दीक और नज़दीक का दूर दिखाते है.
(३) बख़ील-कंजूस लोगोसे भी दोस्ती नहीं करना क्यों के ऐसे लोग ऐन वक़्त पर मदद नहीं करते. उन लोगोसे तुम्हे हमेशा नुकशान ही पहुचता है.
(४) बे-वकूफ लोगोके साथ भी दोस्ती नहीं करना क्यों के ऐसे लोग अगर तुम्हे फायदा पहुचाना चाहे तबभी नुकशान पहुचता है.
(५) रिस्तेदारोंसे ताल्लुक तोड़नेवालोसे भी दोस्ती ना रखे क्यों के किताबे-इलाहीमे आया है के ऐसे लोगो पर अल्लाह तआलाकी लअनत है.
(६) आप फरमाते है के जो लोग दोज़ख़के डरसे इबादत करते है वोह गुलामो और बांदियोमे सुमार होते है. जो लोग जन्नतकी लालचमें इबादत करते है वोह तिजारत करनेवालोमे याने बेपारीयोमे सुमार होते है, और जो लोग सिर्फ और सिर्फ अल्लाह अज़वजलके लिए इबादत करते है वो आज़ाद लोगो की तरह है.
(७) मोअमिन (ईमानवाला) वोह है जो अपने इल्मको अक्लके साथ जोड़कर-मिलाकर रखे, अगर सवाल पूछे तो जानकारी हासिल करनेका इरादा हो अगर चुप रहे तो समझने और अमल करनेके इरादेसे हो.
(८) राहत पर शुक्र करना मुसीबत पर सब्र करनेसे बेहतर है.
(९) सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमका इरशाद है के मैयत कब्रमे ऐसी होती है जिसे पानीमे डूबता हुवा शख्स, जो मदद के इंतज़ारमे रहता है. माँ-बाप या दोस्तकी दुवाए जब कब्रवाले तक पहुचती है तो उसे सबसे ज़यादह सवाब पहुचाती है. अल्लाह तआला दुनयावालोकी दुवाओंसे कब्रस्तानवालो पर पहाड़की मानिंद खैरो-बरकत और नूर नाज़िल फरमाता है. मुर्दोंके लिए दुवा करना उनकी तरफसे सदका करना उनके लिए बेहतरीन तोहफा है.
(10) जिस किसीको अपने किसी भाईकी मौतकी खबर पहुचे और वोह उस मरनेवालेके लिए मग़फ़ेरतकी दुवा करे तो उसे उसके जनाज़ेमें सामिल होनेका सवाब मिलता है.
(११) जो बन्दा अपने वालेदैनकी कब्रकी ज़यारत हर जुम्मा करेगा उस बंदेका सुमार नेक लोगोमे होगा. (हवाला:- मिश्कात शरीफ)
(१२) सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लमका इरशाद है के जो बन्दा कब्रस्तानके करीबसे गुज़रे और दस मर्तबा “कुल-होवल्लाहो अहद” की सूरत पढ़े और उसका सवाब मुर्दोको बख्शे तो उस कब्रस्तानके मुर्दोके बराबर उसेभी सवाब मिलेगा. (हज़रतअली करामाल्लाह वजहू)
(१३) जो शख्स कब्रस्तान पहुचकर सूरे फातेहा, कुल-होवल्लाहो अहद और “अलहाको-मुततकासुर” की सूरत पढ़कर यह दुवा मांगे के “आय अल्लाह! अज़वजल, मेने तेरे कलाममेसे जो कुछभी पढ़ा उसका सवाब मोमिन कब्रवालोको बख्शा, तो रोज़े कयामत वोह कब्रवाले अल्लाह तआलाकी बारगाहे सफाअत करनेवाले बनेगे.

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About aelan

નામ : અબ્દુલ રશીદ મુનશી જન્મ તારીખ : ૧૫/૦૭/૧૯૫૪ જન્મ ભૂમિ : જુનાગઢ (Saurashtra) Gujarat-India અભ્યાસ : એમ.એ., બી.એડ. એલ.એલ.બી. વ્યવસાય : ઓફીસ અધ્યક્ષ સ્થળ : સ્વામી વિવેકાનંદ વિનય મંદિર, જુનાગઢ. મોબાઈલ નંબર : ૦૯૪૨૮3૭૮૬૬૪ ઈ-મેલ : arashidmunshi@gmail.com
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